अजीब दास्तां है ये..

अजीब दास्तां है ये, कहां शुरू कहां ख़त्म..

ये मंजिलें हैं कौन सी, ना वह समझ सके ना हम |

ये रोशनी के साथ क्यूं, धुआं उठा चिराग से..

ये ख्वाब देखती हूं मैं कि जग पढ़ी हूं ख्वाब से |

मुबारकें तुम्हें कि तुम, किसी के नूर हो गए..

किसी के इतने पास हो कि सबसे दूर हो गए |

किसी का प्यार लेकर तुम, नया जहां बसाओगे..

ये शाम जब भी आएगी, तुम हमको याद आओगे |


Additional information :-

गीतकार:- शैलेंद्र, गायक :- लता मंगेशकर, संगीतकार :- शंकर जयकिशन, फिल्म :- दिल अपना और प्रीत पराई (1960)

Submitted by Mihir.


Published by Mihir

i love music and its lyrics.

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